कुछ दोस्तों से सुनने में आया की @greathimalayannationalpark में एक ग्रुप आ रहा जो की foreigners हे सभी के सभी, कुछ कह रहे थे की बो 15 या 20 होंगे तो यही कुछ का कहना था की बो 30 या 35 के करीब हो सकते हैं मैंने भी सबकी बात पर मुंडी हिलाई ! इन्ही सब बातो में कब शाम गयी पता चला, रात होने वाली थी तो मेने घर की तरफ रुख किया !
घर पहुँचते ही मेने छानबीन शुरू कर दी ! 2 4 फ़ोन घुमाये तो पता चला की बात में तो दम था एक बड़े भाई से पता चला की 14 सितम्बर को आ रहे हे बो सब अपना झोला उठा के ! मेने भी अपने मन की बात बड़े भाई के सामने बोल दी "भाई मुझे भी जाना हे उनके साथ"
भाई बोले ठीक हे चले जाना लेकिन थोड़ा बहुत सामान भी उठाना पड़ेगा ! मेने भी झट से कहा हाँ हाँ porter बनके ही सही कम से जाने को तो मिलेगा
मेने कहा "एक दोस्त को भी बोल देता हूँ उसका मन भी है जाने का" उन्होंने उस बात पर हामी भर दी !
मेने कहा "एक दोस्त को भी बोल देता हूँ उसका मन भी है जाने का" उन्होंने उस बात पर हामी भर दी !
अब बस इंतज़ार था तो 14 सितम्बर का
13 सितम्बर रात को 9 बजे मुझे call आया भाई का कहा "सुबह 6 बाली बस में सैंज आ जाना बहि पर तुझे एक गाड़ी मिलेगी उस गाड़ी में निकल जाना सीधा निहारनी "
13 सितम्बर रात को 9 बजे मुझे call आया भाई का कहा "सुबह 6 बाली बस में सैंज आ जाना बहि पर तुझे एक गाड़ी मिलेगी उस गाड़ी में निकल जाना सीधा निहारनी "
मेने रात को ही अपना सारा सामान पैक करने का मस्त प्लान बनाया कमरे में कुंडी लगाई कित्नु परन्तु पता नहीं कैसे
पिताजी ने देख लिया
पिताजी ने देख लिया
और मेने अभी तक उन्हें कुछ बताया भी नहीं है !
अब क्या करू मन में ख्याल आया मेने कुछ न कहते बैग पैक करने में लगा रहा जैसे की मेने कुछ सुना ही न हो !
अब क्या करू मन में ख्याल आया मेने कुछ न कहते बैग पैक करने में लगा रहा जैसे की मेने कुछ सुना ही न हो !
पिताजी चले गए !!
तरीका काम कर गया !
बैग पैक करके में सोने चला गया !
तरीका काम कर गया !
बैग पैक करके में सोने चला गया !
सुबह उठा 5 बजे जो की कभी नहीं उठता था ! सीधा नहाने चला गया ये सोच के पहाड़ो में तो नहाने को तो मिलेगा नहीं इसलिए घर से ही नहा के निकलते है !
6 बज चुके हे और मुझे लग रहा हे की मेरी बस कही छूट न जाए !
6 बज चुके हे और मुझे लग रहा हे की मेरी बस कही छूट न जाए !
जल्दी जल्दी kitchen की तरफ दौड़ता हु ये सोच ककर की रात का कुछ बचा होगा खा क्र निकलता हूँ आगे मिले या न मिले
2 रोटियां नसीब में लिखी थी उन्हें गर्म करके उस पर थोड़ा सा kisan jam लगा के मेने रोले कर ली सोचा रास्ते में चलते चलते खा लूंगा
2 रोटियां नसीब में लिखी थी उन्हें गर्म करके उस पर थोड़ा सा kisan jam लगा के मेने रोले कर ली सोचा रास्ते में चलते चलते खा लूंगा
उतने में सामने आ जाती हे मेरी अम्माजी !!
अब उसने ये बात छुपानी तो बनती थी क्यूंकि पिछली बार जब में गया था तो अम्माजी को रात रात में नींद नहीं आई फ़िक्र जो सता रही थी अपने बेटे की !
अब उसने ये बात छुपानी तो बनती थी क्यूंकि पिछली बार जब में गया था तो अम्माजी को रात रात में नींद नहीं आई फ़िक्र जो सता रही थी अपने बेटे की !
आखिरकार भोलेनाथ की कृपा से में जो पैदा हुआ बो भी मेरी 4 बहनों के बाद !!
अम्माजी ने पूछ ही लिया कहाँ जा रहा हे इतना बड़ा बैग ले कर के !
मेने मन ही मन सोचा अगर इस वक़्त trekking की बात जाहिर की तो अम्माजी मुझे यही रोक देगी, मेने बात पलटी कहा "बड़े बजुर्ग कह गए हे जब घर से निकलने ही बाले हो तो पूछा नहीं करते हे कि जा रहा हो"
अम्माजी ने पूछ ही लिया कहाँ जा रहा हे इतना बड़ा बैग ले कर के !
मेने मन ही मन सोचा अगर इस वक़्त trekking की बात जाहिर की तो अम्माजी मुझे यही रोक देगी, मेने बात पलटी कहा "बड़े बजुर्ग कह गए हे जब घर से निकलने ही बाले हो तो पूछा नहीं करते हे कि जा रहा हो"
पर माँ तो माँ हे ना अपनी बात पे अड़ी रही !
फिर मुझे जुठ का सहारा लेना पड़ा
मेने कहा " दूर एक गांव हे बहा मेला है में अपने दोस्तों के साथ बहा जा रहा हूँ !
इतना कहते हुए में दरवाज़े से बाहर निकल गया ! जाते जाते मेने कहा बहा पर signal नहीं आता हे मेरा phone off रहेगा 4 5 दिन में लौट आऊंगा ! यह कह कर में निकल पड़ा !
मेने कहा " दूर एक गांव हे बहा मेला है में अपने दोस्तों के साथ बहा जा रहा हूँ !
इतना कहते हुए में दरवाज़े से बाहर निकल गया ! जाते जाते मेने कहा बहा पर signal नहीं आता हे मेरा phone off रहेगा 4 5 दिन में लौट आऊंगा ! यह कह कर में निकल पड़ा !
चलते चलते रोटियां खाई और उतने में बस भी आ ही गयी !
7 बजे सैंज पहुँचकर मेने भाई को call की पूछा बाकि के लोग कब तक आएंगे बो कहते हे की 1 2 घंटे में आ ही जायेंगे और "सुन दिलराज के होटल में मेने सेब की पेटी रखी हुई हे उसे भी साथ ले जाना ठीक है"
हाँ जी ठीक !!! मेरा जवाब
दिलराज का होटल खुलने में तो अभी टाइम लग जायेगा तब में क्या करूंगा यहाँ !
ये सोचकर में इधर उधर देखने लगा तो थोड़ी ही दूर दिलराज मेरी तरफ आते हुए नज़र आया "आंख मलते हुए"
नजदीक आते ही मेने कहा अभी सो उठ रही हो मुझे देखो 5 बजे उठा हूँ !!
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कानं आती हे और कहता हे हटो थोड़ा सा दुकान का ताला तो खोल लू
"चाय पिलाते हे आपको"
हाँ हाँ चाय पीने का तो मन कर रहा हे
थोड़ी ही देर बाद एक गाड़ी आती हे 25 30 लोगो से लदी हुई !
मेने अंदाज़ा लगाया की यही हो सकती हे अपनी सवारी
हाँ जी ठीक !!! मेरा जवाब
दिलराज का होटल खुलने में तो अभी टाइम लग जायेगा तब में क्या करूंगा यहाँ !
ये सोचकर में इधर उधर देखने लगा तो थोड़ी ही दूर दिलराज मेरी तरफ आते हुए नज़र आया "आंख मलते हुए"
नजदीक आते ही मेने कहा अभी सो उठ रही हो मुझे देखो 5 बजे उठा हूँ !!
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कानं आती हे और कहता हे हटो थोड़ा सा दुकान का ताला तो खोल लू
"चाय पिलाते हे आपको"
हाँ हाँ चाय पीने का तो मन कर रहा हे
थोड़ी ही देर बाद एक गाड़ी आती हे 25 30 लोगो से लदी हुई !
मेने अंदाज़ा लगाया की यही हो सकती हे अपनी सवारी
मैं गाड़ी के पास गया तो पता लगा की ये तो सारे तो porters है और बो 30 लोगो का ग्रुप पिछले कल ही निहारनी पहुचँ गया है
आज निहारनी से शाकटी जाना है ज़रूरी खबर मिल चुकी है !
सेब की पति डाल दी गयी फिर किसी ने कहा इसे यही छोड़ दो पिछे से कोई गाड़ी आ रही हे उसमे ले आएंगे !
आज निहारनी से शाकटी जाना है ज़रूरी खबर मिल चुकी है !
सेब की पति डाल दी गयी फिर किसी ने कहा इसे यही छोड़ दो पिछे से कोई गाड़ी आ रही हे उसमे ले आएंगे !
सफर शुरू हो चूका है ! जान पहचान हो रही हे गाड़ी के डाले में (pickup) उसमें से एक बंदा निकलता हे सुनील !
सुनील और में साथ में पड़े हे 7th से लेकर 10th तकkv sainj में
सुनील और में साथ में पड़े हे 7th से लेकर 10th तकkv sainj में
उसके बाद बो boys school kullu गया और मैं senior secondary school sainj
अच्छा हुआ कोई तो मिला बात करने क लिए बरना गुगे की तरह बैठे रहना पड़ता
अच्छा हुआ कोई तो मिला बात करने क लिए बरना गुगे की तरह बैठे रहना पड़ता
सिउंड पहुँच कर दो और लोग गाड़ी में चढ़ जाते हे शायद ये भी साथ जा रहे हे
निहारनी पहुंचते पहुंचते 10 बज चुके थे
सैंज नदी की सहायक नदी के किनारे पुल से थोड़ा नीचे उन्होंने अपना camp लगाया था
लगभग 15 tent
सारे foreigners इधर उधर टहल रहे थे कोई ब्रश कर रहा था कोई धूप सेक रहे थे अपने ही मस्ती में थे सब के सब !
हमारे लिए भी ब्रेकफास्ट ready था पुलाव !!
हम सब ने एक एक थाली ली और self service स्टार्ट !
सब ने दबा के खाया, 6 घंटे का पैदल रास्ता जो था निहारनी से शाकटी का !
उतने रिंकू भी शागढ से पैदल बो भी साथ जा रहा था उसके खाना बचा नहीं, कहता सुबह से कुछ खाया नहीं हे ! अब हो सकता मेने कहा !
हम सब हिसाब से सामान pack किया, किसी के कम तो किसी के पास ज़्यादा !
हम दोनों एक बैठ कर उन्हें देखते रहे टटमोर की तरह !
सब निकल पड़े, मेरे हिस्से आती हे सेब की पेटी और रिंकू के पास सामान !
चल पडे राही, राहो को तोपने !!
गाने सुंनते सुनते थकते बैठते रेगंते जैसे तैसे हम चले थे !
रास्ता तो अच्छा हे शकटी तक का लेकिन बिच में छोटी से चढाई आती है उसके क्या कहने !!
porters में ज़्यादातर 18 से 24 उम्र के छोकरे थे हम सब
उसमे एक टेरी था सुनील कहता "एक बीड़ी बना लेते है"
"हाँ हाँ एक तो बनानी ही पड़नी थक भी गए हे बहुत" रिंकू का जवाब
बस बेसे ही बीड़ियाँ बनाते बनाते शाकटी पहुंचे !
शाकटी में पता चला सुनील के पास तो सबसे हल्का समान था तभी में सोचू बार बार बीड़ियाँ बनाने को क्यों बोल रहा हे !
camps लग चुके थे !
बीड़ियाँ खत्म थी, सबसे पहले दुकान तलाशी जाए ये कह के रिंकू शाकटी गांव की तरफ चल पड़ा,
पता चला रास्ता खरब होने की बजह से घोड़े नहीं आ सकते और घोड़े नहीं आ सकते तो दुकान का समान कैसे आएगा !
निराशा हाथ लगी !!
camp बापिस आए तो आग जली थी खाना पक रहा था कहि से जुगाड़ कर के बीड़ी लाई तो आग सेकने में भी मजा आने लगा !
रिंकू ने आज रात का इंतज़ाम कर लिया था !
forest watcher उसका चाचा है आज रात उनके साथ चलो बेसे भी बो अकेले थे तो हमने मौका हाथ से जाने नहीं दिया !
चाचा जी ने आलू न्यूट्री की सब्ज़ी और चावल बनाए !
कुकर खाली कर दिया गया !
खाने के बाद 3 बीड़ी शंकर बूटी !
रजाई कम्बल ली तो हो गए लमलेट !
सुबह चाचा जी कहते हे चलो bird watching करते है !
उन्हें अच्छा खासा ज्ञान हे पक्षियों के बारे में !
हमारे लिए भी ब्रेकफास्ट ready था पुलाव !!
हम सब ने एक एक थाली ली और self service स्टार्ट !
सब ने दबा के खाया, 6 घंटे का पैदल रास्ता जो था निहारनी से शाकटी का !
उतने रिंकू भी शागढ से पैदल बो भी साथ जा रहा था उसके खाना बचा नहीं, कहता सुबह से कुछ खाया नहीं हे ! अब हो सकता मेने कहा !
हम सब हिसाब से सामान pack किया, किसी के कम तो किसी के पास ज़्यादा !
हम दोनों एक बैठ कर उन्हें देखते रहे टटमोर की तरह !
सब निकल पड़े, मेरे हिस्से आती हे सेब की पेटी और रिंकू के पास सामान !
चल पडे राही, राहो को तोपने !!
गाने सुंनते सुनते थकते बैठते रेगंते जैसे तैसे हम चले थे !
रास्ता तो अच्छा हे शकटी तक का लेकिन बिच में छोटी से चढाई आती है उसके क्या कहने !!
porters में ज़्यादातर 18 से 24 उम्र के छोकरे थे हम सब
उसमे एक टेरी था सुनील कहता "एक बीड़ी बना लेते है"
"हाँ हाँ एक तो बनानी ही पड़नी थक भी गए हे बहुत" रिंकू का जवाब
बस बेसे ही बीड़ियाँ बनाते बनाते शाकटी पहुंचे !
शाकटी में पता चला सुनील के पास तो सबसे हल्का समान था तभी में सोचू बार बार बीड़ियाँ बनाने को क्यों बोल रहा हे !
camps लग चुके थे !
बीड़ियाँ खत्म थी, सबसे पहले दुकान तलाशी जाए ये कह के रिंकू शाकटी गांव की तरफ चल पड़ा,
पता चला रास्ता खरब होने की बजह से घोड़े नहीं आ सकते और घोड़े नहीं आ सकते तो दुकान का समान कैसे आएगा !
निराशा हाथ लगी !!
camp बापिस आए तो आग जली थी खाना पक रहा था कहि से जुगाड़ कर के बीड़ी लाई तो आग सेकने में भी मजा आने लगा !
रिंकू ने आज रात का इंतज़ाम कर लिया था !
forest watcher उसका चाचा है आज रात उनके साथ चलो बेसे भी बो अकेले थे तो हमने मौका हाथ से जाने नहीं दिया !
चाचा जी ने आलू न्यूट्री की सब्ज़ी और चावल बनाए !
कुकर खाली कर दिया गया !
खाने के बाद 3 बीड़ी शंकर बूटी !
रजाई कम्बल ली तो हो गए लमलेट !
सुबह चाचा जी कहते हे चलो bird watching करते है !
उन्हें अच्छा खासा ज्ञान हे पक्षियों के बारे में !
| मैं रिंकू शाकटी पुल पर, रिंकू पक्षियों को तोपता हुआ ! |
आज के दिन हमे पहुंचना था base camp 1 जो की एक river stream के साथ में था शाकटी के सामने आता हे घना जंगल जो की preserved forest area है ! उसी जंगल हो कर के जाना हे पानी की बोतल भर दी हे, खाना भी ठूस लिया हे दवा के,जो बचा था उसको साथ में दाल दिया यह सोच के रास्ते में कुछ भी हो सकता है ! भूख लग गयी तो !
भगत be prepared !
चल पड़े हे मज़िल ओर चलते चलते बात चली की कितना टाइम लगेगा आज तो सब अपने अपने point of view रखने लगे, किसी के 4 तो किसी के 6 घंटे लग रहे थे
हम दो निश्चिन्त !
जितने भी लगने दो पहुंचना हे ही रिंकू बीड़ी खोलते हुए !
जो चाचा जी की कृपा से मिली थी 2 बंडल !
बीड़ियाँ बनती गई हम चलते गए
शाम के लगभग 2 या 3 बजे हम पहुंच ही गए !
मुझे और रिंकू को विकास भाई ने सिर्फ टेंट लगाने का काम दे रखा था
पहले एक बीड़ी बनाई गई फिर काम शुरू !
कुछ और दोस्तों ने मदद की वरना हमसे तो हो गया था बो, टेंट लग गए थे अब जो खाना पैक करके लाया था उसको खाने बैठ गए !
खाने के बाद 3 बीड़ियाँ शंकर बूटी !
फिर टेंट में लमलेट !
फिर रात को आवाज़ सुनाई दी खाना खाने वाला तो नहीं रह गया कोई, यह सुन के रिंकू फट से उठा इसके पीछे में भी दाल चावल ठूस के बीड़ियाँ और सो गए चैन की नींद !
सुबह 5 बजे नींद चली गई, ठण्ड बहुत लग रही थी
पता चला
भगत be prepared !
चल पड़े हे मज़िल ओर चलते चलते बात चली की कितना टाइम लगेगा आज तो सब अपने अपने point of view रखने लगे, किसी के 4 तो किसी के 6 घंटे लग रहे थे
हम दो निश्चिन्त !
जितने भी लगने दो पहुंचना हे ही रिंकू बीड़ी खोलते हुए !
जो चाचा जी की कृपा से मिली थी 2 बंडल !
बीड़ियाँ बनती गई हम चलते गए
शाम के लगभग 2 या 3 बजे हम पहुंच ही गए !
मुझे और रिंकू को विकास भाई ने सिर्फ टेंट लगाने का काम दे रखा था
पहले एक बीड़ी बनाई गई फिर काम शुरू !
कुछ और दोस्तों ने मदद की वरना हमसे तो हो गया था बो, टेंट लग गए थे अब जो खाना पैक करके लाया था उसको खाने बैठ गए !
खाने के बाद 3 बीड़ियाँ शंकर बूटी !
फिर टेंट में लमलेट !
फिर रात को आवाज़ सुनाई दी खाना खाने वाला तो नहीं रह गया कोई, यह सुन के रिंकू फट से उठा इसके पीछे में भी दाल चावल ठूस के बीड़ियाँ और सो गए चैन की नींद !
सुबह 5 बजे नींद चली गई, ठण्ड बहुत लग रही थी
पता चला
sleeping bag की liner बजह से ठण्ड लग रही हे
टेंट से बाहर ये सोच के आया कि आग जला लू !
बाहर ठण्ड इतनी थी की साँस तक नहीं ली जा रही !
फट से टेंट में रिंकू भाई ठण्ड लगी कुछ करो, रिंकू घोर निंद्रा में !
जैसे तैसे adjust किया, अब तो धुप का इंतज़ार था !
धुप आई तो सब ब्रेकफास्ट ready करने में जुट गए !
रिंकू एक बना दो तब !!
सुबह सवेरे हम मुद्रा में,
तभी पता चला 2 क्लाइंट बीमार पड़ गए तो 6 लोगो को साथ रुकना 2 कुक और 4 पोर्टर !
आज की hike बहुत steep है ! सामान आज ज़्यादा नहीं था
होले होले चल पड़े हम ढेल की ओर !
ढेल उस जगह का नाम हे जहां हम जा रहे थे
बीड़ियों का कोटा हो गया था, रिंकू को कहीं से पता चला कि बीड़ियों का पैकेट लाया गया है, बो भी special porters के लिए !
सब लोग चल पड़े, ढेल तक का का रास्ता 3 घंटे का था तो हम आराम से चले सबसे लास्ट में !
लेकिन हमे जल्दी पहुंचना था, टेंट भी हमारे पास थे और लगाने भी हमे ही थे
रास्ते में दम लगाया गया और कुछ लोगो के बाद हम भी पहुँच ही गए, थके भी बहुत थे
आज रात यही रुकना है, जहाँ पर एक छोटा सा घर बना हुआ हे, ढेल से थोड़ा सा नीचे !
थोड़ा आराम फिर काम !!
सबसे पहले तो toilet टेंट लगाया गया, फिर बाकि सब टेंट
foreigner भी पहुँच गए !
अँधेरा होने में कुछ देर थी पर उन्होंने ढेल जाने का फैसला किया और हम दोनों ने बही पर रुकने का जिसका बाद में बहुत पछतावा हुआ जब मेने दिशु भाई के फोटो देखे
क्या गजब आए थे चलो जो हुआ बो हुआ अगली बार ऐसी गलती नहीं होगी !
Dinner करने के बाद स्लीपिंग बैग पकड़ा और सो गए।
टेंट से बाहर ये सोच के आया कि आग जला लू !
बाहर ठण्ड इतनी थी की साँस तक नहीं ली जा रही !
फट से टेंट में रिंकू भाई ठण्ड लगी कुछ करो, रिंकू घोर निंद्रा में !
जैसे तैसे adjust किया, अब तो धुप का इंतज़ार था !
धुप आई तो सब ब्रेकफास्ट ready करने में जुट गए !
रिंकू एक बना दो तब !!
सुबह सवेरे हम मुद्रा में,
तभी पता चला 2 क्लाइंट बीमार पड़ गए तो 6 लोगो को साथ रुकना 2 कुक और 4 पोर्टर !
आज की hike बहुत steep है ! सामान आज ज़्यादा नहीं था
होले होले चल पड़े हम ढेल की ओर !
ढेल उस जगह का नाम हे जहां हम जा रहे थे
बीड़ियों का कोटा हो गया था, रिंकू को कहीं से पता चला कि बीड़ियों का पैकेट लाया गया है, बो भी special porters के लिए !
सब लोग चल पड़े, ढेल तक का का रास्ता 3 घंटे का था तो हम आराम से चले सबसे लास्ट में !
लेकिन हमे जल्दी पहुंचना था, टेंट भी हमारे पास थे और लगाने भी हमे ही थे
रास्ते में दम लगाया गया और कुछ लोगो के बाद हम भी पहुँच ही गए, थके भी बहुत थे
आज रात यही रुकना है, जहाँ पर एक छोटा सा घर बना हुआ हे, ढेल से थोड़ा सा नीचे !
थोड़ा आराम फिर काम !!
सबसे पहले तो toilet टेंट लगाया गया, फिर बाकि सब टेंट
foreigner भी पहुँच गए !
अँधेरा होने में कुछ देर थी पर उन्होंने ढेल जाने का फैसला किया और हम दोनों ने बही पर रुकने का जिसका बाद में बहुत पछतावा हुआ जब मेने दिशु भाई के फोटो देखे
क्या गजब आए थे चलो जो हुआ बो हुआ अगली बार ऐसी गलती नहीं होगी !
Dinner करने के बाद स्लीपिंग बैग पकड़ा और सो गए।
सुबह 6 बजे नींद चली गई मैने रिंकू को उठाया और कैमरा पैक कर के हम चल पड़े ढेल की ओर ।
करीब 30 minute का रास्ता था
सीधा ऊपर माता का छोटा सा खुला मन्दिर नज़र आता है ।
अभी धूप आने में वक़्त था तो हमने ढेल के छोर तक जाने का फैंसला किया ।
ढेल बहुत लंबा घास का ढलानदार मैदान है ।
छोर तक पहुंचने को 40 से 45 मिनट लगे ।
एक तरफ ढलानदार मैदान तो दूसरी तरफ खाई।
सैंज वैली का बहुत अच्छा नज़ारा नज़र आता है। सुबह के समय ठंड बहुत थी ।
एक छोर से धूप निकलती हुई नजर आ रही थी तो कुछ जान के जान आई कि धूप थोड़ी देर में आ ही जाएगी।
धूप का इंतजार बही किया गया ।
ठंड थी तो बीड़ियों का जोर लगा रहा।
धूप आते ही हम बापिस आ गए मन्दिर की ओर
बहा पर दिशु भाई और कुछ और लोग आटे का बना प्रसाद ले कर आए मन्दिर में चढ़ाने के लिए !
Photos भी click किए कुछ एक कभी अपने कभी रिंकू के
अब रिंकू के पास कैमरा थमा दिया और में बीड़ी बनाने में ब्यस्त, रिंकू भरपूर कोशिश करके photos clicks करने में ब्यस्त ।
थोड़ी देर में निकल पड़े campsite की ओर braekfast तैयार हो रही थी टेंट पैक करने की जिम्मेदारी हमारी।
अपना काम निपटा के हम बैठ गए ।
बीड़ी बनाई गई ।
चाय भी ले आया कोई । उसका भी धन्यवाद करके रिंकू ने उसे भी एक कस पिला दिया।
आज हमें शाकटी तक जाना था
थोड़ी ही देर में निकलना पड़ेगा । रिंकू दिमाग लगते हुए कहता है
अगर शाकटी तक जाना है तो जल्दी निकलना पड़ेगा नही तो रास्ते मे ही अंधेरा हो जाएगा।
ठीक ठीक
Breakfast करके निकल गए
नीचे को उतराई होने के कारण टाइम कम लगा ।
शाकटी लगभग 5 बजे
बहुत खूब भाऊ good. evrythiNg is possible with love/strugle
ReplyDeleteAwesome creations bro outstanding
ReplyDeleteAwesome creations bro outstanding
ReplyDeleteAaj subah subah Trek ki yaad taza ho gyi. Mere dimag me pura picture samne aa gya. Bahut achha likhte ho Bhai.
ReplyDeleteThankyou bhai
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